मधुबनी में शारदीय नवरात्र के दौरान बेलन्योती की रस्म अदा की गई। देवी दुर्गा की आंखों में ज्योति प्रदान करने के लिए बेल का लस्से का उपयोग किया जाएगा। भक्त मां कालरात्रि की आराधना कर रहे हैं, जो शत्रुओं…
मधुबनी, हिन्दुस्तान टीम। शारदीय नवरात्र में बुधवार को शुभ मुहूर्त में गाजे व बाजे के साथ बेलन्योती की रस्म अदा की गई। इसी निमंत्रित बेल के लस्से से सुबह में देवी दुर्गा की आंखों में ज्योति प्रदान की जाएगी। इसके बाद मां का पट खोल दिया जाएगा। शहर के गंगासागर काली मंदिर दुर्गा स्थान, गिलेशन दुर्गा मंदिर, आर के कालेज रोड दुर्गा मंदिर, भौआरा दुर्गा मंदिर, कोतवाली चौक दुर्गा मंदिर और आदर्श नगर दुर्गा पूजा कमेटी शाम में गाजे-बाजे के साथ पालकी लेकर बिल्व वृक्ष के समीप पहुंची। वहां पर पंडितों द्वारा विधि विधान से बिल्व को निमंत्रित किया गया। फिर दुर्गा मंदिर पहुंचे। रांटी के वैदिक पंडित धीरेन्द्र कुमार झा उर्फ नन्हे ने बताया कि नवरात्र में बेल न्योति की रश्म अदा करने की परम्परा है। उन्होंने बताया कि इसी निमंत्रित बेल के लस्से से देवी दुर्गा की आंखों में ज्योति प्रदान कर प्राण-प्रतिष्ठा अर्पित की जाएगी। शत्रुओं का नाश करती हैं मां कालरात्रि: महाशक्ति मां दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं मां कालरात्रि, मां कालरात्रि काल का नाश करने वाली हैं, इसी वजह से इन्हें कालरात्रि कहा जाता है।
शहर के ज्योतिषाचार्य डॉ. सुनील श्रीवास्तव ने कहा कि मां कालरात्रि की आराधना के समय भक्त को अपने मन को भानु चक्र जो ललाट अर्थात सिर के मध्य स्थित करना चाहिए। इस आराधना के फलस्वरूप भानु चक्र की शक्तियां जागृत होती हैं। मां कालरात्रि की भक्ति से हमारे मन का हर प्रकार का भय नष्ट होता है। जीवन की हर समस्या को पल भर में हल करने की शक्ति प्राप्त होती है। शत्रुओं का नाश करने वाली मां कालरात्रि अपने भक्तों को हर परिस्थिति में विजय दिलाती हैं।
नवपत्रिका प्रवेश आज, मां दुर्गा का दर्शन करेंगे भक्त: यहां नवपत्रिका का अर्थ है नौ पत्तियां। इस पूजा में नौ पत्तियों को एक साथ बांधकर उनकी पूजा करने का विशेष महत्व माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस पूजा से साधक को माता दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है। स्टेशन चौक स्थित हनुमानप्रेम मंदिर के पुजारी पंडित पंकज झा शास्त्री के अनुसार नव-पत्रिका पूजा को महा सप्तमी भी कहते है। कहा जाता है कि यह दुर्गा पूजा का पहला दिन होता है। इसके बाद इन नव-पत्रिका को महा सप्तमी के दिन दुर्गा पंडाल में मां दुर्गा के समीप रख दिया जाता है। इस पूजन को देखने मात्र से मनोकामनाएं पूर्ण होती है तथा मां का आशीर्वाद मिलता है। इस पूजा को देखने के लिये प्रतिवर्ष काफी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में जुटते हैं। ऐसी मान्यता है कि मां जिस भक्त पर प्रसन्न होती हैं उसे ही निशा पूजा देखने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इसमें माता दुर्गा की पूजा और साधना करते हैं। नवरात्र में साधक और तांत्रिक लोग निशीथ काल में पूजा करते हैं। इसी बीच सभी के लिए महा निशा पूजा होती है।