CAFE-3: क्या सस्ती कारें महंगी हो जाएंगी? जानें क्या हैं कैफे-3 नियम और क्यों हैं चर्चा में?

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प्रस्तावित कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE-3) नियमों का उद्देश्य वाहनों के उत्सर्जन को कम करना है। लेकिन इंडस्ट्री का कहना है कि इन नियमों से एंट्री-लेवल (सस्ती) कारों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।

क्या सस्ती कारों की कीमत 17% तक बढ़ सकती है?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इंडस्ट्री सूत्रों का कहना है कि, CAFE-3 लागू होने पर एंट्री-लेवल कारों की कीमत में करीब 17 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।

यह अनुमान ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) के आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा है।

जहां BEE ने तकनीकी अपग्रेड के लिए करीब 15,000 रुपये प्रति वाहन का अनुमान लगाया है। वहीं इंडस्ट्री का मानना है कि असल लागत 25,000 रुपये (करीब 7 प्रतिशत) तक पहुंच सकती है।

अगर फ्लेक्स-फ्यूल या कार्बन-न्यूट्रल विकल्प अपनाए जाते हैं, तो यह लागत 65,000 रुपये (करीब 17 प्रतिशत) तक जा सकती है।




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CAFE-3 मानदंड भारत में एंट्री-लेवल कार की कीमतें 17% तक बढ़ा सकते हैं, फिर भी उत्सर्जन लक्ष्य अभी भी असंभव हैं

Car Pollution
– फोटो : Adobe Stock


क्या इतने खर्च के बाद भी उत्सर्जन लक्ष्य पूरे नहीं होंगे?

चौंकाने वाली बात यह है कि इतने खर्च के बाद भी कंपनियां तय उत्सर्जन लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएंगी।

उदाहरण के तौर पर:

  • 740 किलोग्राम की एंट्री-लेवल कार का उत्सर्जन लगभग 83.43 g CO₂/km रहेगा

  • जबकि FY32 का लक्ष्य 62.04 g CO₂/km है

यानी करीब 21.39 g CO₂/km का अंतर बना रहेगा।

फ्लेक्स-फ्यूल विकल्प अपनाने पर भी लगभग 7.49 g CO₂/km का अंतर रहेगा।


CAFE-3 मानदंड भारत में एंट्री-लेवल कार की कीमतें 17% तक बढ़ा सकते हैं, फिर भी उत्सर्जन लक्ष्य अभी भी असंभव हैं

Auto Sales
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क्या कंपनियों पर दोहरी मार पड़ेगी?

इंडस्ट्री का कहना है कि कंपनियों को एक साथ दो तरह का बोझ उठाना पड़ सकता है:

इससे लागत और बढ़ेगी, जिसका असर सीधे ग्राहकों पर पड़ेगा।

लागत इतनी ज्यादा क्यों बढ़ रही है?

असल खर्च केवल पार्ट्स तक सीमित नहीं है। इसमें शामिल हैं:

  • इंजीनियरिंग बदलाव

  • सप्लायर अपग्रेड

  • टेस्टिंग और वैलिडेशन

इंडस्ट्री का कहना है कि BEE के अनुमान में इन खर्चों को पूरी तरह शामिल नहीं किया गया है।


CAFE-3 मानदंड भारत में एंट्री-लेवल कार की कीमतें 17% तक बढ़ा सकते हैं, फिर भी उत्सर्जन लक्ष्य अभी भी असंभव हैं

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क्या छोटी कारों का बाजार खत्म हो सकता है?

छोटी कारें सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी, क्योंकि यह सेगमेंट कीमत को लेकर बहुत संवेदनशील है और पहली बार कार खरीदने वालों के लिए एंट्री पॉइंट होता है।

एक्सपर्ट्स का मानना है:

  • कंपनियां छोटी कारों की बजाय एसयूवी पर ज्यादा ध्यान दे सकती हैं

  • भारत में यह ट्रेंड पहले से दिख रहा है

FY19 से FY25 के बीच छोटी कारों की बिक्री में करीब 62 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है।


CAFE-3 मानदंड भारत में एंट्री-लेवल कार की कीमतें 17% तक बढ़ा सकते हैं, फिर भी उत्सर्जन लक्ष्य अभी भी असंभव हैं

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क्या बड़े वाहनों पर असर कम होगा?

हां, एसयूवी और बड़ी कारों पर असर अपेक्षाकृत कम होगा क्योंकि:

  • उनकी बेस कीमत पहले से ज्यादा होती है

  • उनमें कई तकनीकी फीचर्स पहले से मौजूद होते हैं

क्या GST छूट का फायदा खत्म हो जाएगा?

इंडस्ट्री का कहना है कि CAFE-3 के कारण बढ़ने वाली लागत, छोटी कारों पर दी गई जीएसटी छूट के फायदे को लगभग खत्म कर सकती है।

यानी जो राहत पहले मिली थी, वह अब बेअसर हो सकती है।




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