‘अपमान नजरअंदाज करें, न्याय हो प्राथमिकता’, पूर्व CJI चंद्रचूड की वकीलों को सीख

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भारत के पूर्व चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने वकील बनने की चाहत रखने वाले लोगों को सलाह दी है कि वे विरोधियों के अपमान को नजरअंदाज करें, क्योंकि इससे उन्हें मुकदमे जीतने में मदद नहीं मिलेगी. उन्होंने कहा कि वे सेवानिवृत्ति के बाद भी इसी सिद्धांत का पालन कर रहे हैं.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने शनिवार (09 अगस्त, 2025) को विष्णुपंत एडवांट व्याख्यान श्रृंखला के दौरान विधि छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि वकालत एक तनावपूर्ण पेशा है और वकीलों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को व्यवस्थित तरीके से दूर किया जाना चाहिए.

नैतिकता को दें प्राथमिकता

उन्होंने यह भी कहा कि वकीलों को अपनी पहचान को हर चीज से पहले न्याय के सुविधादाता के रूप में दोबारा स्थापित करना चाहिए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नैतिकता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि सफलता का कोई ‘शॉर्टकट’ नहीं है और कानून के छात्रों को आजीवन सीखने वाला और स्वतंत्र विचारक होना चाहिए. कानून के दिग्गज जानकार और अनुभवी अधिवक्ता फली नरीमन की वकीलों को दी गई सलाह का हवाला देते हुए पूर्व चीफ जस्टिस ने कहा कि अपनी राय के प्रति हमेशा ईमानदार और जिम्मेदार रहें.

कानून और तथ्यों को गहराई से जानें

विधि छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अपने कानून और तथ्यों को गहराई से जानें और ध्यान रखें कि आप अपने मामले को पुराने फैसलों के जरिये सही ठहराने की कोशिश में न भटक जाएं.

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