नीट पेपर लीक के मास्टरमाइंड संजीव मुखिया को आज गिरफ्तार किया गया है। इस पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि हमारे सूत्रों के अनुसार उसे गिरफ्तार नहीं किया गया है, बल्कि उसने आत्मसमर्पण किया है। पुलिस उसे ढूंढने में नाकाम रही है।
।
आगे कहा कि वह सरकार का पसीना छुड़ाते रहा है। संजीव मुखिया की पत्नी LJP की उम्मीदवार रही है। ऐसे में सरकार हमें यह बता दे कि सरकारी तंत्र और सरकार में बैठे नेताओं का उनसे संबंध है या नहीं।
हमारी सरकार आई तो होगी बीपीएससी परीक्षा में धांधली की जांच
70वीं बीपीएससी के प्रारंभिक परीक्षा में धांधली पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजेश राम ने बीपीएससी के चेयरमैन पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि गुजरात में मूल निवासी चेयरमैन पर कई धांधली के आरोप हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी कांग्रेस पार्टी अभ्यर्थियों के पक्ष में खड़ी रहेगी और उनकी लड़ाई को लड़ेगी। हमारी सरकार आई तो इस परीक्षा में हुई धांधली की जांच भी कराई जाएगी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम सहित अन्य।
बिहार को बनाया धांधली का अड्डा
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार के सभी उच्च शिक्षण संस्थान, विश्वविद्यालय और शैक्षणिक केंद्र पर लगभग बिहार के बाहर से आकर राजभवन के माध्यम से पदाधिकारी नियुक्ति पाएं हुए हैं और उन्होंने बिहार को धांधली का अड्डा बनाकर अपने पद का दोहन किया है। राजेश राम ने कहा कि बीपीएससी की 70वीं प्रारंभिक परीक्षा में हुई अनियमितताओं, प्रश्नपत्र लीक, SOP के उल्लंघन और परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियों को लेकर हजारों छात्रों ने न्याय की उम्मीद में माननीय सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार नहीं किया और हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें परीक्षा प्रक्रिया को वैध ठहराया गया था। हम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में मानते हैं कि देश की सर्वोच्च अदालत का निर्णय अंतिम होता है और उसका सम्मान करना लोकतंत्र में हमारी जिम्मेदारी है, क्योंकि वही हमारी न्यायिक व्यवस्था की रीढ़ है।
सड़क से संसद तक लड़ेगी कांग्रेस
वहीं, प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष शिव प्रकाश गरीब दास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का हम सम्मान करते हैं, लेकिन यह भी उतना ही सत्य है कि इस मामले में साफ धांधली दिख रही है और हम चुप नहीं बैठेंगे। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस छात्रों की इस लड़ाई को सिर्फ अदालत में नहीं, हर मंच पर लड़ेगी- सड़क से संसद तक, न्यायालय से जन-जागरण तक। हम इस निर्णय की समीक्षा के लिए पुनर्विचार याचिका या अन्य उपलब्ध कानूनी उपायों का सहारा लेंगे। यह केवल परीक्षा की बात नहीं है, यह युवा भारत के भविष्य की बात है और हम किसी भी कीमत पर अपने युवाओं के अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे।