पहले यह बयान पढ़िए…
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‘अब लालू की संपत्ति सीज की जाएगी। उसमें बच्चों के लिए स्कूल खोले जाएंगे। लालू प्रसाद रजिस्टर्ड अपराधी हैं। 950 करोड़ रुपए का चारा घोटाला किया। अपराधियों ने पैसा और प्रॉपर्टी अर्जित की है तो उसे सीज करके उसमें स्कूल जरूर खोले जाएंगे।- सम्राट चौधरीउप-मुख्यमंत्री, बिहार सरकार
सम्राट चौधरी का यह बयान तब सामने आया है जब पटना के प्राइम लोकेशन पर आयकर विभाग ने बेनामी संपत्ति को स्थायी रूप से अटैच किया है। यह वही जमीन है, जिसको लेकर सुशील मोदी ने लालू फैमिली के होने का दावा किया था। हालांकि, कागजों पर इसके मालिक लालू यादव नहीं हैं।
भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए, इनकम टैक्स की अटैच संपत्ति की पूरी कहानी…
सबसे पहले जानिए अटैच जमीन की कहानी
जमीन पटना के शेखपुरा मोड़ पर सेंट्रल स्कूल के सामने है। इनकम टैक्स के मुताबिक यह पटना के राइडिंग रोड (शेखपुरा मोड़ से एयरपोर्ट जाने वाली सड़क) पर है। शेखपुरा इलाका शास्त्री नगर थाना क्षेत्र में है। इसका रेवेन्यू थाना-9 है। पटना नगर निगम के वार्ड 33, सर्किल न. 247, होल्डिंग न. 666/129 A है।
आयकर विभाग के मुताबिक, कोठी 7105 वर्गफीट (5.22 कट्टा) में फैली है। यह प्लांट संख्या 1780 से 1782 का हिस्सा है। कोठी का खाता संख्या 445 से लेकर 446/410 तक है। यह जमीन प्लाट संख्या 1775 का हिस्सा भी है। सभी 4 प्लाट का तौजी संख्या 5769 है।
कोठी के अंदर की हालत जंगल जैसी हो गई है। पेड़-पौधे उग गए हैं।
20 करोड़ की है जमीन
आयकर विभाग के मुताबिक, जमीन की मौजूदा सरकारी कीमत 3.67 करोड़ रुपए है। बाजार में ऐसे लोकेशन की जमीन की कीमत 20 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है। इस जमीन के बगल में एक कार कंपनी का शोरूम है। पूरी जमीन कॉमर्शियल है।
कब अटैच्ड की गई यह जमीन?
आयकर विभाग ने इस जमीन को अस्थायी (प्रोविजनली) तौर पर 2018 में अटैच्ड किया था। 7 साल बाद जमीन को स्थायी रूप से अटैच किया है। इनकम टैक्स ने बेनामी संपत्ति अंडर टेक करने के लिए 11 दिसंबर 2025 को आदेश जारी किया। इसके बाद इनकम टैक्स पटना आईटीओ (बीपीओ) ने प्रशासक नियुक्त किया। अगले 7 दिनों में जमीन सरकार की होगी।
1990 से 2000 तक गेस्ट हाउस
एकीकृत बिहार में यह कोठी गेस्ट हाउस था। 1990 से 2000 तक संयुक्त बिहार के दौरान और उसके बाद के वर्षों तक यह टाटा कंपनी का दफ्तर तथा गेस्ट हाउस था। स्व. सुशील मोदी ने आरोप लगाया था कि लालू-राबड़ी के शासन काल में टाटा कंपनी को अनेक प्रकार से फायदा दिया गया था। उपकृत किया गया। 2002 में यह बेशकीमती जमीन और मकान की खरीद दिखाई गई। उस वक्त बिहार की मुख्यमंत्री राबड़ी देवी थीं।
कोठी के किचेन से लोग मार्बल तक चुराकर ले गए हैं।
अब जानिए कोठी की मौजूदा स्थिति क्या है?
कोठी की मौजूदा स्थिति झाड़ जंगल वाली है। खाली जमीन पर झाड़ी है। पेड़ उगे हुए हैं। कोठी के सेट बैक एरिया में बड़े-बड़े पेड़-पौधे हैं।
खिड़की-दरवाजे को लोग उखाड़ ले गए। 10 कमरे वाली इस कोठी में किसी भी कमरे के दरवाजे नहीं बचे हैं। चौखट सलामत है, लेकिन दरवाजा गायब। कोठी में लगे बिजली के बोर्ड, तार और स्विच तक उखाड़ लिए गए हैं। अलमारी आदि तहस-नहस कर दिए गए हैं। लोग किचन के मार्बल तक उखाड़ ले भागे हैं।
कोठी में प्रवेश करने के लिए दो मुख्य गेट हैं। ग्राउंड फ्लोर पर 7 कमरे और एक बड़ा हॉल है। पार्किंग के लिए बड़े गराज हैं। फस्ट फ्लोर पर बड़े-बड़े कमरे हैं। यहां तीन रूम हैं, गराज के ऊपर बहुत बड़ा हॉल है। सभी तीनों रूम में वॉशरूम हैं। यहां के नल खोल लिए गए हैं। बेसिन और कमोड तक गायब हैं।
स्कूल के लिए कितना मजबूत है भवन?
ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान दिखा कि भवन की नींव काफी मजबूत है। अभी इसे कुछ हुआ नहीं है। दीवार पर लगी वॉल पुट्टी खराब नहीं हुई है। ग्राउंड और पहले पहली मंजिल की छत भी मजबूत है। छत के बाहरी हिस्से और बालकनी वाला हिस्सा टूटा हुआ है। दरक रहा है। थोड़े मेंटेनेंस से यह ठीक हो सकता है। रंगाई-पुताई के बाद चकाचक हो जाएगा।
कोठी नशेड़ियों का अड्डा बन गई है। जहां-तहां सिरिंज और सूई मिले।
कोठी बन गई नशेड़ियों का अड्डा
कभी गुलजार रहने वाली कोठी आज नशा करने वालों का अड्डा बनी हुई है। नशेड़ियों ने पीछे की खिड़की तोड़कर एंट्रेंस गेट बना दिया है। इसी गेट से वे अंदर घुसते और नशा करते हैं। कोठी में दिन रात नशा करने वाले युवक पड़े रहते हैं। हमें यहां बड़ी संख्या में नशा करने वाली दवा के खाली बॉटल, सिरिंज, निडिल और सिगरेट के जले हिस्से दिखे।
क्या कहते हैं आसपास रहने वाले?
आस-पास के लोग इसे नशेड़ियों का अड्डा बताते हैं। कोठी के पड़ोस में रहने वाले छोटू ने बताया कि कोठी सालों से खाली है। यहां आम लोग नहीं आते जाते। नशेड़ियों ने अड्डा बना लिया है। वे चौबीस घंटे वही पड़े रहते हैं। पुलिस आती है और पैसे लेकर उन्हें छोड़ देती है।
पड़ोसी सौरभ कुमार ने कहा, ‘इस मकान में नशा करने वाले आते जाते हैं। वे लोग यहां सूई लगाते हैं। तरह-तरह के नशा करते हैं।’ पड़ोसी करन कुमार ने कहा, ‘यह लालू परिवार का बताया जाता है। यहां यही चर्चा है कि लालू प्रसाद यादव की कोठी है, जिसे जब्त किया गया है।’
सुशील मोदी ने लालू परिवार के होने का किया था दावा
स्व. सुशील कुमार मोदी ने आरोप लगाया था कि कोठी लालू यादव की है। उन्होंने कहा था, ‘लालू प्रसाद ने न केवल अपनी बेटियों को टाटा के कोटे पर मेडिकल कॉलेज में नामांकन कराया, बल्कि पटना स्थित टाटा के गेस्ट हाउस को भी अपने परिवार की संपत्ति बना ली।’
उन्होंने आरोप लगाया था कि 30 अक्टूबर 2002 को टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड की 7105 वर्ग फुट जमीन पर बनी कोठी को लालू परिवार ने खरीदा। कोठी 5348 वर्ग फुट में बनी है। दो मंजिले मकान को फर्जी कंपनी (जिसके निदेशक तेजस्वी सहित लालू परिवार है) ने खरीदा।
सुशील मोदी ने कहा था, ‘तेजस्वी यादव और लालू परिवार ने ‘फेयरग्रो होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड’ नामक फर्जी कंपनी का मुखौटे के रूप में इस्तेमाल कर टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी के दो मंजिला मकान सहित जमीन के मालिक बन बैठे।’