अब बिलासपुर में आदिवासी विकास विभाग में सहायक आयुक्त के पद पर कार्यरत है आरोपी अफसर।
सरगुजा जिले के वाड्रफनगर जनपद पंचायत के तत्कालीन CEO और वर्तमान में बिलासपुर में पदस्थ आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त सीएल जायसवाल की मुश्किलें बढ़ गई है। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दी है। एसीबी कोर्ट ने भ्रष्टाचार के केस में उनके खिलाफ
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दरअसल, आदिवासी विकास विभाग में पदस्थ सहायक आयुक्त सीएल जायसवाल साल 1996 में वाड्रफनगर में जनपद पंचायत सीईओ थे। इस दौरान साल 1998 में राज्य सरकार ने शिक्षाकर्मी ग्रेड-3 के रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की थी। आरोप है कि जायसवाल समेत अन्य ने अपने चहेते उम्मीदवारों को बिना किसी योग्यता के लाभ देकर नियुक्त करने के लिए अनियमितताएं कीं। उनका अवैधानिक तरीके से चयन किया गया। नियमों को दरकिनार कर रिश्तेदारों का भी नियुक्ति दे दी गई। शिकायत मिलने पर सरगुजा के तत्कालीन कलेक्टर ने जांच के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई। जांच में अनियमितताएं मिली। जिसके बाद एसीबी/ईओडब्ल्यू बिलासपुर ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
एसीबी कोर्ट ने तय किया है आरोप शिक्षाकर्मी ग्रेड-3 की भर्ती में हुए घोटाले के आरोपी सीएल जायसवाल के खिलाफ विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) बलरामपुर ने 27 जून 2018 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) और आईपीसी की धारा 120-बी के तहत आरोप तय किया है। आरोपी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।
बचाव में यह तर्क दिए, कोर्ट ने नहीं माना आरोपी के वकील ने हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई के दौरान तर्क दिया कि उसे झूठा फंसाया गया है। वह चयन प्रक्रिया रोकने का आदेश दे चुका था और बाद में उसका तबादला हो गया था। उसने किसी भी अभ्यर्थी का चयन नहीं किया। जबकि राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि आरोपी चयन समिति का पदेन अध्यक्ष था। उसने रिश्वत लेकर अभ्यर्थियों का चयन किया और दस्तावेजों में हेरफेर की। गवाहों के बयान में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने साक्षात्कार में अंक देने में हेरफेर किया। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने उनकी तर्कों को नहीं माना। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को मामले की सुनवाई जारी रखने का निर्देश दिया है। साथ ही पूर्व में दी गई किसी भी तरह की अंतरित राहत भी हटाने का आदेश दिया है।
इस तरह की गई थी अनियमितता जांच में पाया गया कि आरोपी और चयन समिति के 9 सदस्यों ने निष्पक्ष चयन प्रक्रिया का पालन नहीं किया। इंटरव्यू के अंक मनमाने तरीके से दिए गए। ओबीसी और एससी वर्ग की सूची में हेराफेरी गई। कई अभ्यर्थियों को ज्यादा नंबर देकर चयनित किया गया, जबकि योग्य उम्मीदवारों को बाहर कर दिया गया।
रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगे, आरोप तय करने लगे 27 साल जायसवाल समेत अन्य पर आरोप लगाया गया कि रिश्वत लेकर अभ्यर्थियों का चयन किया। गवाहों के बयान में सामने आया कि रिश्वत न देने पर कुछ अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया। जांच में चयन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के स्पष्ट प्रमाण मिले। एसीबी ने लंबी जांच प्रक्रिया के कोर्ट में चार्जशीट पेश किया। जिसके बाद कोर्ट ने ट्रॉयल के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) और आईपीसी की धारा 120-बी के तहत आरोप तय किया है।