रोहिडा में श्रीमहावीर स्वामी जिन मंदिर के अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव के 5वें दिन प्रभु जन्म कल्याणक उत्सव का आयोजन किया गया।
जैनाचार्य रविरत्नसूरीश्वरजी और आचार्य जयेशरत्नसूरीश्वर की निश्रा में 56 दिक् कुमारिकाओं ने अनिल भाई सालेचा के संगीत पर नृत्य प्रस्तुत किया। सुप्रसिद्ध विधिकारक विरल भाई शाह ने मंत्र विधानों के साथ उत्सव संपन्न कराया। इस अवसर पर नगर की छोटी बच्चियों को दिक् कुमारिकाएं बनने का सौभाग्य मिला। आचार्यश्री ने जन्म कल्याणक का महत्व समझाते हुए बताया कि तीर्थंकर प्रभु के जन्म के समय तीनों लोकों में उत्साह फैल जाता है। स्वर्गलोक की दिक् कुमारिकाएं अवधिज्ञान से प्रभु के जन्म का ज्ञान होने पर पृथ्वी पर आती हैं। वे सूति कर्म करती हैं और दर्पण, दीपक, चामर आदि के साथ नृत्य कर जन्मोत्सव मनाती हैं। इसके बाद चौंसठ इंद्र परिवार सहित आकर मेरू पर्वत पर पाण्डुशिला पर जन्माभिषेक करते हैं, जिसे जन्म कल्याणक कहा जाता है। एक रंग की वेशभूषा पहनकर 64 इंद्रों का रूप धारण किया
इस उत्सव में रोहिडा नगर के भाई-बहनों ने एक रंग की वेशभूषा पहनकर 64 इंद्रों का रूप धारण किया, जिससे सभा में उत्साह का माहौल था। महाराष्ट्र से आए रत्न-कला ग्रुप ने भी आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया।
जसनाथ स्टूडियो, सूरत ने दिक् कुमारिकाओं के दृश्यों को एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के माध्यम से स्क्रीन पर सुंदर रूप से प्रदर्शित किया, जिसने दर्शकों को काफी प्रभावित किया। महोत्सव के अगले दिन दोपहर में सिद्धार्थ राजा की ओर से महावीर प्रभु का जन्म कल्याण उत्सव मनाया जाएगा।
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