जमुई के झाझा प्रखंड अंतर्गत बरमसिया पुल दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश में धंस गया है। पुल के टूटने से झाझा प्रखंड के 10 पंचायतों के करीब 20 हजार लोगों का मुख्यालय से सीधा संपर्क टूट गया है। पहले जहां लोग सिर्फ 2 किमी का रास्ता तय कर झाझा मुख्यालय
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25 साल पुराना पुल, निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह पुल करीब साल 2000 में बना था और लंबे समय से जर्जर स्थिति में था। बारिश के चलते पुल का अगला हिस्सा बीच से टूट गया है और तीन जगहों पर दरारें साफ देखी जा रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुल के निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था और यह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया।
राजू राय और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पुल टूटने के बाद भी कोई वरीय अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। लोगों के आक्रोश के बाद आरडब्लूडी (RWD) के एसडीओ रोहित कुमार मौके पर पहुंचे। हालांकि, पहले उन्होंने कैमरा देखकर बचने की कोशिश की, लेकिन बाद में उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जानकारी वरीय पदाधिकारियों को भेजी गई है।
दो दर्जन गांवों की राह हुई मुश्किल
बरमसिया पुल के क्षतिग्रस्त होने से महापुर पंचायत के चांय, बरमसिया, चितोचक, महापुर, तुंबा पहाड़ सहित दो दर्जन से अधिक गांवों के लोग प्रभावित हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार को पहले ही चेताया गया था, लेकिन जर्जर पुल की मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया गया।
कमिशन सिस्टम से पुल कमजोर बनते हैं- स्थानीय निवासी
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिहार में ठेकेदारों को काम मिलने से पहले अधिकारियों और नेताओं को कमीशन देना पड़ता है, जिससे निर्माण में भ्रष्टाचार होता है। “ऐसे भ्रष्ट निर्माण की कीमत हम आम जनता को चुकानी पड़ती है,” एक स्थानीय निवासी ने कहा।
बारिश में पुल बहने का खतरा
भास्कर की टीम ने मौके पर देखा कि पुल की स्थिति बेहद नाजुक है। लगातार बारिश होती रही तो यह पुल रातभर में पूरी तरह नदी में समा सकता है। प्रशासन से आपात कदम उठाने की मांग की जा रही है, ताकि वैकल्पिक मार्ग या अस्थायी पुल बनाया जा सके।
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