उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शुक्रवार (26 दिसंबर, 2025) को त्रिपुरा के एक 24 साल के पोस्ट ग्रेजुएट छात्र एंजेल चकमा की चाकू मारकर हत्या कर दी गई. इस घटना को कथित तौर पर नस्लीय आधार पर हमला करार दिया है, जिसने तीखी राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है. इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भी इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने त्रिपुरा के छात्र की हत्या को राष्ट्रीय कलंक करार दिया है.
शशि थरूर ने एक्स पर किया पोस्ट?
त्रिपुरा के छात्र की मौत पर कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोमवार (29 दिसंबर, 2025) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया. उन्होंने इस अपराध को गहरी सामाजिक पूर्वाग्रहों के साथ जोड़ा. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में हुई यह बर्बर हत्या सिर्फ एक त्रासदी नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय कलंक है.
उत्तराखंड में अनिल चकवा की नृशंस हत्या सिर्फ एक त्रासदी नहीं है – यह एक राष्ट्रीय अपमान है। त्रिपुरा के एक युवा व्यक्ति, जो एक गौरवान्वित भारतीय है, के साथ नस्लीय दुर्व्यवहार किया गया, “चीनी” और “मोमो” जैसी गालियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और अंततः उसकी हत्या कर दी गई। यह हिंसा का कोई अलग कृत्य नहीं था;… pic.twitter.com/WHmA0m7Q0L
– शशि थरूर (@ShashiTharoor) 29 दिसंबर 2025
उन्होंने कहा, ‘त्रिपुरा का एक युवा, जो गर्व से भारतीय था, उसे नस्लीय गालियां दी गईं, उसे चीनी और मोमो जैसे शब्दों से अमानवीय तरीके से अपमानित किया गया और अंत में उसकी हत्या कर दी गई. यह हिंसा की कोई अलग-थलग घटना नहीं थी, यह अज्ञानता, पूर्वाग्रह और हमारे समाज की उस विफलता का नतीजा है, जिसमें हम अपनी ही विविधता को पहचानने और सम्मान देने में चूक रहे हैं.’
यह घटना बेहद शर्मनाक है- शशि थरूर
कांग्रेस नेता ने इस घटना को चिंताजनक प्रवृति का बताते हुए कहा, ‘यह चौंकाने वाला और बेहद शर्मनाक है कि उत्तर भारत में नस्लवाद बढ़ रहा है, जो अक्सर हल्के-फुल्के मजाक या संस्थागत उपेक्षा की आड़ में छिपा रहता है.’ उन्होंने कहा कि उत्तर-पूर्व राज्यों के लोगें के खिलाफ भेदभाव भारत की मूल अवधारणा पर चोट करता है. पूर्वोत्तर अपनी समृद्ध संस्कृतियों, भाषाओं और परंपराओं के साथ भारतीय पहचान का कोई दूर का हिस्सा नहीं है, बल्कि वह उसका केंद्र है. फिर भी इस इलाके के लोगों को अक्सर नस्लीय प्रोफाइलिंग, बहिष्कार और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है. यह अब बंद होना चाहिए.’
अदालतों से परे जवाबदेही की मांग करते हुए थरूर ने कहा, ‘हमें अनिएल (एंजेल चकमा) के लिए न्याय की मांग सिर्फ अदालतों में ही नहीं, बल्कि राष्ट्र की अंतरात्मा में भी करनी होगी. उसकी मौत को किसी आंकड़े या कुल पलों की सुर्खी तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए.’
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