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चिन्मय दास की जमानत खारिज होने से खफा हुआ इस्कॉन, यूनुस सरकार से की ये भावुक अपील

चिन्मय दास की जमानत खारिज होने से खफा हुआ इस्कॉन, यूनुस सरकार से की ये भावुक अपील
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चिन्मय दास की जमानत खारिज: बांग्लादेश के चटगांव की एक अदालत ने गुरुवार (2 जनवरी 2025) को सम्मिलिता सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता और इस्कॉन के पूर्व नेता चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को जमानत देने से इनकार कर दिया. चिन्मय दास की जमानत याचिका रद्द होने के बाद इस्कॉन कोलकाता के प्रवक्ता राधारमण दास ने चिंता जाहिर की है और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से मांग की है कि वह उन लोगों पर कार्रवाई करे जो चिन्मय दास के वकील के साथ मारपीट और धमकी दे रहे हैं.

उन्होंने कहा कि मामले की सुनवाई का इकलौता सकारात्मक पक्ष यह रहा कि चिन्मय कृष्ण दास का प्रतिनिधित्व अदालत में वकीलों की ओर से किया गया, पिछली सुनवाई में ऐसा नहीं किया गया था. राधारमण दास ने कहा कि चिन्मय कृष्ण दास की तबीयत भी खराब बताई जा रही है.

नए साल में चिन्मय दास के रिहा होने की थी उम्मीद

राधारमण दास ने कहा है कि उन्हें उम्मीद थी कि नए साल के मौके पर चिन्मय दास की रिहा कर दिया जाएगा. राधारमण दास ने कहा, “हमें लगा था कि उनकी तबीयत खराब होने और उनके पिछले 40 दिनों से जेल में होने के आधार पर  जमानत मिल जाएगी, लेकिन इस बार भी जमानत न मिलना दुखद है.”

‘बांग्लादेश सरकार करें कार्रवाई’

पिछली सुनवाई के दौरान चिन्मय दास के वकील कोर्ट में उपस्थित नहीं हो सके थे. दरअसल उनके वकीलों पर हमला हुआ था इसलिए वे सुनवाई में शामिल नहीं हो सके थे. राधारमण दास ने कहा कि अगर चिन्मय कृष्ण के लिए पेश होने वाले किसी भी वकील की पिटाई करने की धमकी दी जाती है, तो बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को इस मामले में कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए.

सरकारी वकील और चिन्मय दास के वकील ने क्या दी दलीलें?

चटगांव कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया था कि यह देशद्रोह का मामला है जिसमें अधिकतम उम्रकैद की सजा हो सकती है और वे जमानत का विरोध कर रहे हैं क्योंकि मामले की जांच चल रही है. वहीं राज्य ने कोर्ट से जमानत न देने की प्रार्थना की है.

सुनवाई के दौरान चिन्मय कृष्ण दास के वकीलों ने कहा कि झंडे के अपमान को लेकर चिन्मय दास के खिलाफ दर्ज किया गया राजद्रोह का मामला निराधार है. चिन्मय दास की ओर से जिरह कर रहे 11 वकीलों की टीम के प्रमुख सुमन कुमार रॉय ने कहा, “सबसे पहली बात तो यह कि रैली के वीडियो में इस्कॉन के झंडे के नीचे जो झंडा फहराया गया है, वह असल में चांद-सितारों वाला झंडा है. यानी यह बांग्लादेश का झंडा नहीं है. इसके अलावा वादी की ओर से मामले में झंडे के अपमान की कोई धारा नहीं जोड़ी गई है और जिस झंडे को अपमानित करने का आरोप लगाया गया है वह जब्ती सूची में नहीं है.”

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