PMAY-शहरी: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 (पीएमएवाई-यू) में कुछ नए मानदंड जोड़े गए हैं। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के मुताबिक सरकार की महत्वाकांक्षी आवास योजना के सुचारू संचालन के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के दूसरे चरण के तहत राज्यों का योगदान अनिवार्य कर दिया गया है। पहले ऐसा कोई प्रावधान नहीं था। केंद्रीय मंत्री ने कहा- पीएमएवाई 2.0 में कुछ मापदंडों में बदलाव किया गया है। राज्यों का योगदान अनिवार्य कर दिया गया है क्योंकि इस आवास योजना के पहले चरण के दौरान कुछ कठिनाइयां आई थीं।
क्या है योजना
मोदी सरकार ने इस वर्ष लोकसभा चुनाव के बाद अपनी पहली कैबिनेट बैठक में अगले पांच वर्षों में पात्र शहरी गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अतिरिक्त एक करोड़ घरों के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) 2.0 को मंजूरी दे दी है। पीएमएवाई-यू 2.0 पांच वर्षों में शहरी क्षेत्रों में घर बनाने, खरीदने या किराए पर लेने के लिए राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों/प्राथमिक ऋण संस्थानों (पीएलआई) के माध्यम से 1 करोड़ शहरी गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को केंद्रीय सहायता प्रदान करेगी। इस योजना के तहत ₹ 2.30 लाख करोड़ की सरकारी सहायता प्रदान की जाएगी। योजना के पहले चरण में कुल 1.18 करोड़ घरों को मंजूरी दी गई है, जबकि 85.5 लाख से अधिक घरों का पहले ही निर्माण हो चुका है और ये लाभार्थियों को दिए किए जा चुके हैं।
किस वर्ग को फायदा
दूसरे चरण की योजना का फायदा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस)/निम्न आय वर्ग (एलआईजी)/मध्यम आय वर्ग (एमआईजी) परिवार को मिलेगा। ईडब्ल्यूएस की कैटेगरी में ₹3 लाख तक की वार्षिक आय वाले परिवार के लोग आते हैं। ₹3 लाख से ₹6 लाख तक की वार्षिक आय वाले परिवारों को एलआईजी कैटेगरी में रखा जाता है। इसके अलावा ₹6 लाख से ₹9 लाख तक वार्षिक आय वाले परिवारों को एमआईजी कैटेगरी में रखा गया है।
योजना का कार्यान्वयन कुल 4 तरीके से किया जाता है। इसमें से एक ब्याज सब्सिडी योजना है। इसके तहत लाभार्थी को होम लोन पर सब्सिडी मिलती है। पात्र लाभार्थियों को 5-वार्षिक किश्तों में कुल ₹1.80 लाख की सब्सिडी जारी किए जाने का प्रस्ताव है। बता दें कि ₹25 लाख तक का होम लोन लेने वाले लाभार्थी 12 वर्ष की अवधि तक के पहले 8 लाख रुपये के लोन पर 4 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी के लिए पात्र हैं। वहीं, ₹35 लाख तक की कीमत वाले मकान के लिए यह लागू है।