योग टिप: योग एक प्राचीन विधा है, जिसमें आपको निरोगी, यानी हेल्दी बनाये रखने की पूरी क्षमता है. भारत इसकी जन्मभूमि है, पर आज लगभग पूरा विश्व इस भारतीय विधा को अपनाकर इसका लाभ ले रहा है. कारण, यह न केवल हमें शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाता है, बल्कि मानसिक रूप से भी हमें स्वस्थ, शांत और एकाग्र बनाता है. जानते हैं, योग विशेषज्ञ से कि बदलते मौसम में हम योग के माध्यम से किस तरह हेल्दी बने रह सकते हैं.
शोभना श्रीवास्तव
योग प्रशिक्षक
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बदलता मौसम- अंदर गर्मी, बाहर बारिश. ऐसे में हमें कई तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है. इन दिनों अधिकतर लोग थ्रोट इंफेक्शन, यानी गले के संक्रमण से परेशान हो जाते हैं. पर घबराने की जरूरत नहीं है. उज्जयी प्राणायाम आपको न केवल गले के संक्रमण को दूर करने में सहायता करेगा, बल्कि इस क्रिया को करने से दमा और सांस लेने में होने वाली समस्या में भी आपको आराम मिल सकता है.
ऐसे करें प्राणायाम
योग में कई तरह की प्रक्रियाएं होती हैं, उज्जयी प्राणायाम उन प्रकियाओं या क्रियाओं का ही एक हिस्सा है. आमतौर पर सभी प्राणायाम खाली पेट किये जाते हैं, पर उज्जयी प्राणायाम को लेकर ऐसा कोई नियम नहीं है. इसे आप जब चाहें, तब कर सकते हैं.
- प्राणायाम को करते हुए अपने गले को बिल्कुल सीधा और टाइट रखें.
- अब दोनों नाक से सांस लेते हुए आवाज निकालें और जालंधर बंध के साथ सांसों को अंदर रोक कर रखें.
- इसके बाद दायीं नाक (right nostril) को बंद करके बायीं नाक (left nostril) से सांस छोड़ें.
- यहां इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि सांस अंदर लेने में जितना समय आपको लगा, उससे दोगुने समय के लिए सांसों को रोककर रखना है. इसके लिए निरंतर अभ्यास की जरूरत होती है.
सावधानी
इस प्राणायाम में समस्या को देखते हुए सांस को रोकने की क्रिया करनी होती है.
- ब्लड प्रेशर और अस्थमा रोगी को सांस रोकने की अनुमति नहीं है. उन्हें केवल सांस लेना और छोड़ना है.
- वहीं यदि आपको सर्वाइकल की समस्या है, तो आपको जालंधर बंध नहीं लगाना है.
- जिन लोगों को थायरॉयड की दवा चल रही है, उन्हें कम से कम 11 बार रोज उज्जयी प्राणायाम करना चाहिए.
- सांस लेते हुए आवाज निकालना आसान नहीं होता है, पर नियमित अभ्यास से आप ऐसा कर पायेंगे.
प्राणायाम के लाभ
गला हमारा अपना डॉक्टर है. डॉक्टर ब्लड टेस्ट के पहले हमारे गले की ही जांच करते हैं, क्योंकि सांस, खाना-पानी सबकुछ इसी से होकर हमारे भीतर जाता है. ऐसे में गले को यदि उज्जयी प्राणायाम से मजबूत कर लिया जाये, तो हम तमाम तरह के संक्रमण से बच सकते हैं. इस प्राणायाम के और भी कई लाभ हैं.
- जिन्हें बार-बार गले में संक्रमण की समस्या होती है, नियमित उज्जयी प्राणायाम से उनकी यह समस्या दूर हो सकती है.
- यदि आपको थायरॉयड है, तो उज्जयी प्राणायाम से आपको आराम मिलेगा. इस प्राणायाम को करने से थायरॉयड ग्लैंड पर ध्वनि (Sound Rays) तथा सांस का घर्षण होता है. इस घर्षण से एनर्जी बढ़ती है, जिससे हमारी इम्यूनिटी मजबूत होती है. इससे थायरॉयड बैलेंस होने लगता है.
- इस प्राणायाम से टॉन्सिलाइटिस की प्रॉब्लम और स्नोरिंग यानी खर्राटे लेने की समस्या से छुटकारा मिलता है.
- इससे हमारा स्ट्रेस दूर होता है.
- वैसे छोटे बच्चे, जो स्पष्ट बोल नहीं पाते हैं- हकलाते हैं, तुतलाते हैं, उन्हें यदि इस प्राणायाम को कराया जाये, तो उनकी यह समस्या दूर हो सकती है.
ऐसे लगायें जालंधर बंध
जालंधर बंध में ठुड्डी (chin) को छाती (chest) तक लाकर उसे छूना होता है. उज्जयी प्राणायाम में सांस को अंदर रोककर जालंधर बंध लगाया जाता है, इस बात का आपको ध्यान रखना होगा.
Disclaimer: हमारी खबरें जनसामान्य के लिए हितकारी हैं. लेकिन दवा या किसी मेडिकल सलाह को डॉक्टर से परामर्श के बाद ही लें.