Ground Reprot : बेगूसराय में खाद की किल्लत या कालाबाजारी ? ब्लैक में 300 रुपए की हो रहीं वसूली का दोषी कौन ?

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Samastipur local News: बेगूसराय के बछवाड़ा प्रखंड में किसानों को खाद की कमी सता रहीं है. यहां किसानों ने लोकल 18 के माध्यम से कालाबाजारी के दोषियों पर कार्यवाही की मांग करते हुए क्या कहा… देखिए ग्राउंड रिपोर्…और पढ़ें

बेगूसराय : बिहार के बेगूसराय में किसान खाद की किल्लत से परेशान हैं. सरकारी स्तर से जो व्यवस्था होनी चाहिए थी वह व्यवस्था सरकारी फाइलों तक की सीमित रह गई. लिहाजा बेगूसराय जिले के किसानों को खाद कालाबाजारी का शिकार होना मजबूरी बन चुका है . प्रखंड व्यापार मंडल में कई घंटे लाइन लगने के बावजूद किसानों को जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल पाती और जब फसलों में खाद देने का समय हो तो व्यापार मंडल हाथ खाली कर लेते हैं . सौ बात की एक बात यह कि जरूरत के समय किसानों को खाद की कालाबाजारी का शिकार होना पड़ता है ? और जब फसलों में खाद देने का समय खत्म हो गया तब व्यापार मंडल में खाद उपलब्ध हो पता है फिर भी किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पाता है . लोकल 18 ने बछवाड़ा प्रखंड से खाद की स्थिति का किसानों के बीच जाकर जायज़ा लिया. देखिए ग्राउंड रिपोर्ट

बछवाड़ा में खाद की किल्लत या कालाबाजारी ?
बेगूसराय जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर बछवाड़ा प्रखंड समस्तीपुर जिले का सीमावर्ती इलाका है. इस इलाके में बड़े पैमाने पर किसान खेती करते हैं . यहां के किसानों को सरकारी स्तर पर खाद मिल ही नहीं पाता है. हर समय खाद की यहां पर सरकारी दुकानों में बताई जाती है ? किसानों की माने तो डीएपी के जरूरत के वक्त सरकारी स्तर पर यूरिया उपलब्ध कराया जाता है और यूरिया की जरूरत हो तो किसानों को डीएपी खरीदने के लिए कहा जाता है. इतना ही नहीं किसानों का यह भी आरोप है कि यह खाद भी अगर लेना चाहे तो किसानों को लंबी लाइन लगती पड़ती है . इसके बावजूद जरूरत के मुताबिक बैग किसानों को नहीं मिल पाते हैं . खाद के किल्लत के बीच न तो जांच और न ही कोई कार्रवाई विभाग के द्वारा की जाती है . प्रखंड कृषि पदाधिकारी या फिर एसडीओ की जिम्मेदारी जांच और कार्यवाही की होती है लेकिन कालाबाजारी करने वालों से यह भी मिले प्रतीत होते हैं . जिस वजह से किसान परेशान हैं.

100 से 300 रुपए तक ज्यादा किसानों को देना पड़ता है कालाबाजारी टैक्स

बछवारा प्रखंड के किसान मुनाजिर हसन ने बताया घाट की स्थिति यह है कि डीएपी खोजने पर यूरिया मिलता है और यूरिया खोजने पर डीएपी ? इतना ही नहीं प्रत्येक किसानों को प्राइवेट दुकान से लेने में 266 रुपए का यूरिया 340 तक में मिलता है ठीक इसी प्रकार डीएपी खाद का बोरा 1700 से ₹1800 तक में किसानों को मिलता है . यानी इस बोरे पर भी ₹300 से ₹400 तक ज्यादा किसानों से वसूला जाता है. किशन शंकर यादव सहित अन्य किसानों ने बताया हम लोगों को हमेशा ब्लैक में ही खाद खरीदना पड़ता है . और हर बार प्रति बोरा 100 से 300 रुपए या इससे ज्यादा भी देने पड़ते हैं. सरकारी फाइलों में ही जब किसानों को उचित मूल पर जब खाद मिलेगा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना किसानों की आमदनी दोगुनी हो यह कैसे पूरा होगा ? बछवाड़ा प्रखंड में जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी खाद की कालाबाजारी रोकने की है वो रोकने में विफल क्यों हैं ? क्या जिला कृषि पदाधिकारी और संबंधित अधिकारी कालाबाजारी के कारोबार में शामिल है ? अब देखना यह होगा कि क्या कुछ जिलाधिकारी तुषार सिंघला एक्शन ले पाते हैं जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना पूरा हो .

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Ground Reprot : बेगूसराय में खाद की किल्लत या कालाबाजारी ? ब्लैक में 300 रुपए की हो रहीं वसूली का दोषी कौन ?



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