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सुतीहारा से सिल्वर स्क्रीन तक: छोटे से गांव से निकलकर बने भोजपुरी के अमरीश पुरी

सुतीहारा से सिल्वर स्क्रीन तक: छोटे से गांव से निकलकर बने भोजपुरी के अमरीश पुरी
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Famous personalities: भोजपुरी फिल्मों में खलनायक भूमिकाओं में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अवधेश मिश्रा का नाता बिहार के सीतामढ़ी जिले से है। उन्होंने अपने अभिनय से हर किसी का दिल जीता है। आइये जानते हैं उनके बारे में…

पटना पहुंचकर उन्होंने थिएटर से अभिनय की बारीकियां सीखीं। मंचीय अभिनय ने उनके एक्सप्रेशन, संवाद अदायगी और किरदार में ढलने की क्षमता को मजबूत किया। इसी थिएटर अनुभव ने आगे चलकर उन्हें फिल्मों में जगह दिलाई और वह भोजपुरी सिनेमा की ओर बढ़ते चले गए।

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अवधेश मिश्रा ने 2005 में भोजपुरी फिल्म ‘दुल्हा अइसन चाही’ से एक्टिंग करियर की शुरुआत की। पहली ही फिल्म में उनके खलनायक के किरदार को इतनी लोकप्रियता मिली कि दर्शकों और फिल्म इंडस्ट्री दोनों ने उन्हें बड़े कलाकार के रूप में पहचानना शुरू कर दिया।

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तीखे चेहरे-मोहरे के भाव, गहरी आवाज और मजबूती से बोले गए संवादों ने अवधेश को अलग पहचान दी। वे जिस भी फिल्म में खलनायक बने, वहां उनका किरदार दर्शकों के दिमाग में बस गया। यही मजबूती उन्हें भोजपुरी का ‘अमरीश पुरी’ कहलाने का आधार बनी।

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भोजपुरी सिनेमा में नाम कमाने के बाद अवधेश मिश्रा ने हिंदी और दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी काम किया। तमिल फिल्म ‘Poojai’ और हिंदी फिल्म ‘Dirty Politics’ में उनकी मौजूदगी ने यह साबित किया कि वे सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि बहुमुखी कलाकार हैं।

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करीब दो दशक के फिल्मी सफर में अवधेश मिश्रा सौ से अधिक फिल्मों में नजर आ चुके हैं। कई प्रतिष्ठित अवॉर्ड और सम्मान उन्हें मिल चुके हैं। आज वे सिर्फ विलेन नहीं बल्कि एक सशक्त अभिनेता के रूप में पहचाने जाते हैं, जिनकी अभिनय पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है।

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छोटे गांव से निकलकर बड़े पर्दे पर मुकाम पाने की उनकी कहानी संघर्ष और मेहनत का शानदार उदाहरण है। अवधेश मिश्रा ने साबित किया कि जुनून और लगन हो तो सपने हकीकत बनते हैं। आज वे युवाओं के लिए प्रेरणा और भोजपुरी सिनेमा के लिए गर्व बने हुए हैं।

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