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नदी में बहा दी बच्चों की किताबें, बुरा फंसे सहरसा स्कूल के हेड मास्टर साहब

नदी में बहा दी बच्चों की किताबें, बुरा फंसे सहरसा स्कूल के हेड मास्टर साहब
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saharsa news today: कई ऐसे माता-पिता हैं जो पैसों के अभाव में बच्चों की पढ़ाई नहीं कराते हैं. बच्चों की पढ़ाई का बोझ माता-पिता पर न पड़े इसके लिए सरकार की तरफ से बच्चों को फ्री किताबें दी जाती हैं. ये किताबें ब…और पढ़ें

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जिस पुस्तक से बच्चों का भविष्य होता उज्जवल उस पुस्तक को नदी में फेंक दिया गया

सहरसा: सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से बच्चों को स्कूल से किताबें दी जाती हैं. यह किताबें इसलिए दी जाती हैं जिससे कि किसी भी कारण से बच्चों के पास पाठ्य सामग्री यानी किताबों का अभाव न हो. ऐसे में पता चले कि बच्चों को देने वाली किताबें  हेड मास्टर ने नदी में फेंक दी तो आपको कैसा लगेगा. यह मामला बिहार के सहरसा से सामने आया है जहां सरकार की भेजी गई किताबों का बोझ हेड मास्टर साहब उठा नहीं पाए और उन किताबों को नदी में फेंक दिया. हालांकि, हेड मास्टर साहब को नदी में किताबें फेंकना महंगा पड़ गया.

अब हेड मास्टर बुरी तरह से फंस गए और उन पर मामला भी दर्ज हो गया. तो चलिए आपको बताते हैं कि आखिर यह पूरा मामला क्या है और किताबों को नदी में फेंकने की वजह क्या है. पूरा मामला सहरसा जिले के महिषी प्रखंड क्षेत्र के मध्य विद्यालय कुंदह से जुड़ा हुआ है. स्कूल के प्रधानाध्यापक सुरेश कुमार पर बच्चों के लिए भेजी गयी पुस्तकों को कोसी नदी में बहाने का मामला सामने आया है. इसे लेकर महिषी बीडीओ सह प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुशील कुमार ने जलई थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है.

थाने में दी गई शिकायत में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुशील कुमार ने कहा कि सूचना मिली कि प्रधानाध्यापक ने शैक्षणिक वर्ष 2024-25 की पाठ्य पुस्तकें कोशी नदी में बहाया है. जांच में दो बोरा किताबें भींगी हुई मिली. बीडीओ ने कहा कि जांच के दौरान सामने आया कि विद्यालय के कक्षा आठ के छात्र सनमोल कुमार और मनीष कुमार नदी के महार पर घूम रहे थे इसी दौरान नजर आया कि बोरे में पुस्तकें बह रही हैं. उसने हल्ला किया तो एक ग्रामीण रतन सादा ने नदी में हिलकर 2 बोरा किताब निकाला और चार बोरा किताबें नदी के बहाव में बह गईं.

ग्रामीणों की शिकायत पर जांच की गई तो जांच क्रम में प्रधानाध्यापक ने इस पूरे मामले को कबूल किया. पूछताछ में उन्होंने कहा कि कमरे के अभाव में ऐसा किया गया है. इसके साथ ही पिछले शैक्षणिक वर्ष में नामांकन और पुस्तक वितरण का प्रतिवेदन भी उनके खुद के हस्ताक्षर से समर्पित की गई.

बीडीओ ने कहा कि कागजात के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि गत शैक्षणिक वर्ष में वर्ग एक से आठ तक 354 था जिसके विरुद्ध मात्र 220 छात्र/छात्राओं को ही पाठ्य पुस्तक का वितरण किया गया जो कुल नामांकित छात्र का 62 प्रतिशत है. बीडीओ ने प्रधानाध्यापक सुरेश कुमार को विद्यालय संचालन में अक्षम बताते हुए कहा कि यह कृत्य छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने, सरकारी सम्पत्ति को जान बूझ कर नष्ट करने, स्वेच्छाचारिता, पद का दुरुपयोग, मनमानेपन और सरकारी राशि के गबन को परिलक्षित करता है. इसे लेकर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई गई है.

इस बाबत जलई थानाध्यक्ष ममता कुमारी ने बताया कि महिषी प्रखंड विकास पदाधिकारी के आवेदन पर सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर कारवाई की जा रही है.

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