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बेगूसराय में किसानों की आय बढ़ाने के लिए बिहार सरकार ‘फसल विविधीकरण योजना’ के तहत आंवला की खेती को बढ़ावा दे रही है. 15 हेक्टेयर में खेती का लक्ष्य तय, प्रति हेक्टेयर 50% सब्सिडी मिलेगी.ऑनलाइन आवेदन पहले आओ-पहल…और पढ़ें
बेगूसराय : किसानों की आय बढ़ाने के लिए बिहार सरकार (Bihar Government) ने इस साल ‘फसल विविधीकरण योजना’ के तहत आंवला की खेती को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है. उद्यान निदेशालय, कृषि विभाग का मानना है कि आंवला जैसी बागवानी फसलें कम लागत में ज्यादा मुनाफा दिला सकती हैं और जलवायु परिवर्तन के दौर में टिकाऊ खेती का बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए बेगूसराय जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य योजना मद से आंवला की खेती कराई जाएगी.
15 हेक्टेयर में आंवला की खेती, दो किस्तों में मिलेगा अनुदान
बेगूसराय जिला उद्यान विभाग के अनुसार जिले में 15 हेक्टेयर में आंवला की खेती का लक्ष्य रखा गया है. जिले के 18 प्रखंडों में से साम्हों, अकहा कुरुहा और साहेबपुर कमाल प्रखंड को इस योजना से बाहर रखा गया है. किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये लागत मूल का 50% अनुदान मिलेगा. यह राशि दो किस्तों में दी जाएगी — पहली किस्त पौधा लगाने के बाद कुल अनुदान की 60% राशि और दूसरी किस्त अगले साल दी जाएगी. 1 हेक्टेयर में किसानों को 400 पौधे लगाने होंगे.
15 हेक्टेयर में आंवला की खेती, दो किस्तों में मिलेगा अनुदान
बेगूसराय जिला उद्यान विभाग के अनुसार जिले में 15 हेक्टेयर में आंवला की खेती का लक्ष्य रखा गया है. जिले के 18 प्रखंडों में से साम्हों, अकहा कुरुहा और साहेबपुर कमाल प्रखंड को इस योजना से बाहर रखा गया है. किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये लागत मूल का 50% अनुदान मिलेगा. यह राशि दो किस्तों में दी जाएगी — पहली किस्त पौधा लगाने के बाद कुल अनुदान की 60% राशि और दूसरी किस्त अगले साल दी जाएगी. 1 हेक्टेयर में किसानों को 400 पौधे लगाने होंगे.
ऑनलाइन आवेदन से मिलेगा योजना का लाभ
बेगूसराय उद्यान विभाग ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को उद्यान विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. योजना का फायदा पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर मिलेगा. एक किसान 0.1 हेक्टेयर से लेकर अधिकतम 4 हेक्टेयर तक के लिए आवेदन कर सकता है. आवेदन के साथ 2 वर्ष के अंदर की जमीन की रसीद देना अनिवार्य है.वेरिफिकेशन के बाद वर्क ऑर्डर जारी होगा और फिर राशि सीधे किसानों के खाते में भेजी जाएगी.
अक्सर देखा जाता है कि पारंपरिक फसलों की खेती में समय और लागत खर्च करने के बावजूद किसान मुनाफा नहीं कमा पते हैं. ऐसे में राज्य सरकार की इस योजना से ऐसे किसानों को काफी फायदा होने की उम्मीद है जो मुनाफे को ध्यान में रखकर खेती करते हैं.