‘साहब! बेड मिल जाता तो बच्ची जिंदा होती’, परिजन के इतना कहते ही मंत्री जी तपाक से बोले- ‘बेटा क्रिया खाओगे’?

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मुजफ्फरपुर. बिहार में एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी बाद में मौत ने पूरे राज्य में सियासी तूफान खड़ा कर दिया है. 5 जून 2025 को बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा पीड़िता के परिवार से मिलने मुजफ्फरपुर के कुढ़नी पहुंचे. इस मुलाकात के दौरान परिजनों ने गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर समय पर अस्पताल में बेड और इलाज मिला होता, तो बच्ची की जान बच सकती थी. इतना कहने पर बिहार सरकार के एक और मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने कहा, ‘बेटा कसम खाओ’ (बिहार में बेटा क्रिया बोला जाता है)? हलांकि, जिस अंदाज में सवाल सवाल पूछा गया, वह भी सही लहजा नहीं था. इसके बावजूद पंचायती राज मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता अब विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं. वहीं, विजय सिन्हा ने इस घटना के बाद वहां मौजूद प्रशासन के अधिकारियों से भावुक अंदाज में कहा, ‘अगर मेरा बेटा क्रिमिनल है तो उसका भी एनकाउंटर कर दो. कोई अपराधी नहीं बचेगा.’

मुजफ्फरपुर के कुढ़नी में हुए इस जघन्य दुष्कर्म मामले में पीड़िता को गंभीर हालत में पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) ले जाया गया था, लेकिन वहां समय पर बेड और उचित इलाज न मिलने के कारण रविवार को उसकी मौत हो गई. परिजनों ने डिप्टी सीएम से मिलकर कहा, “सर, समय पर अस्पताल में बेड मिल जाता तो बच्ची जिंदा होती.” उन्होंने प्रशासन की लापरवाही और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर सवाल उठाए. एक परिजन ने कहा, “हम घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. यह संस्थागत हत्या है.” इस मुलाकात का एक वीडियो तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें परिजनों की नाराजगी साफ दिख रही है.

विजय सिन्हा का जवाब और विवाद

विजय सिन्हा ने पीड़िता के परिवार को सांत्वना दी और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया. उन्होंने कहा, “विपक्ष इस मुद्दे पर राजनीति कर रहा है, लेकिन सरकार अपराधियों को बख्शेगी नहीं. अगर मेरा बेटा भी क्रिमिनल हो, तो उसका एनकाउंटर कर दो.” यह बयान जहां सख्ती का संदेश देता है, वहीं विपक्ष ने इसे संवेदनहीनता का प्रतीक बताया. आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि सिन्हा और स्थानीय बीजेपी विधायक केदार गुप्ता ने परिजनों को डराने-धमकाने की कोशिश की. एक एक्स पोस्ट में तेजस्वी ने लिखा, “परिजनों ने जब लापरवाही के सवाल उठाए, तो उन्हें धक्का देकर भगाया गया. क्या यही है सुशासन?”

सरकार की कार्रवाई और आलोचना

इस मामले में बिहार सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, मुजफ्फरपुर के मेडिकल सुपरिटेंडेंट को निलंबित कर दिया. साथ ही, PMCH के कार्यवाहक डिप्टी सुपरिटेंडेंट अभिजीत सिंह को भी उनकी जिम्मेदारियों से हटा दिया गया, क्योंकि उन्होंने मामले को ठीक से नहीं संभाला. लेकिन विपक्ष का कहना है कि ये कार्रवाइयां नाकाफी हैं. आम आदमी पार्टी ने भी ट्वीट कर कहा, “मानवता को शर्मसार करती बीजेपी. बच्ची कई घंटों तक बेड के लिए तड़पती रही, और अब परिजनों को धमकाया जा रहा है.”

सियासी घमासान और चुनावी माहौल

यह घटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले हुई है, जिसने एनडीए सरकार को बैकफुट पर ला दिया है. तेजस्वी यादव और कांग्रेस ने इसे सुशासन के दावों की पोल खोलने वाला बताया है. दूसरी ओर, सिन्हा ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “हमारी सरकार अपराधियों को कठघरे में लाएगी. यह समय संवेदनशीलता दिखाने का है, न कि राजनीति का.” विजय सिन्हा की परिजनों से मुलाकात और उनका बयान सरकार की मंशा को दर्शाता है, लेकिन परिजनों की शिकायतें और विपक्ष का हमला एनडीए के लिए चुनौती बन रहा है.



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