हस्त रेखा शास्त्र में जिस तरह से हाथ की भाग्य रेखा का अध्ययन किया जाता है, उसी तरह से पैरों में पद्म रेखा (भाग्य रेखा) के जरिए व्यक्ति के स्वभाव, व्यक्तित्व व भविष्यफल की गणना की जाती है। हस्त रेखा शास्त्र के अनुसार, पुरुषों का दायां पैर व स्त्रियों के बाएं पैर में स्थित रेखाएं महत्वपूर्ण मानी गई हैं। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि पुरुषों के बाएं पैर व स्त्रियों के दाएं पैर की रेखाएं फलादेश के लिए महत्व नहीं रखती हैं।
पैरों की पदम रेखा से जुड़ी खास बातें- हस्त रेखा शास्त्र के अनुसार, भाग्य रेखा यानी पदम रेखा पैरों में खड़ी पाई जाती है। यह रेखा जितनी गहरी, स्पष्ट व लंबी होती है, माना जाता है कि व्यक्ति उतना ही सुख-सुविधाओं पूर्ण जीवन बिताता है। कहा जाता है कि अगर यह रेखा एड़ी के निचले भाग से शुरू होकर अंगूठे तक जाए तो व्यक्ति खूब प्रसिद्धि हासिल करता है।
2. सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार, अगर पैरों के मध्य से निकलकर तीन रेखा एक साथ आगे बढ़ें और उसमें से एक रेखा अंगुलियों से तक पहुंचे तो जातक को हर क्षेत्र में सफलता हासिल होती है।
3. अगर पैरों के मध्य भाग से निलकर एक खड़ी रेखा सीधा अंगुलियों तक पहुंचे तो माना जाता है कि ऐसा व्यक्ति भाग्यशाली होता है। अगर यह रेखा सिर्फ अनामिका अंगुलि तक जाए तो व्यक्ति आलसी स्वभाव का माना गया है।
4. अगर किसी व्यक्ति के पैरों के अंगूठे के नीचे कोई खड़ी रेखा विद्यमान हो तो व्यक्ति को पराक्रमी, तेजस्वी, धनवान व यशस्वी माना जाता है।
5. सामुद्रिक शास्त्र कहता है कि अगर पैरों के तलवे के बीच अंगुलियों तक खड़ी रेखा के समकक्ष एक और रेखा हो तो स्त्री या पुरुष सुख-संपदा व वैभव प्राप्त करते हैं।