रामलीला :भरत मिलाप देख श्रद्धालुओं की आंखें हो जाती हैं नम

Spread the love share


शहर में भरत मिलाप समारोह धूमधाम से मनाया गया। शोभा यात्रा में लोग ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाते रहे। रामलीला के दौरान भाई राम और भरत की भावनात्मक गले मिलने के दृश्य ने सभी की आंखों में आंसू ला दिए। यह…

न्यूज़रैप हिन्दुस्तानछपरागुरु, 10 अक्टूबर 2024 03:51 अपराह्न
शेयर करना शेयर करना

भरत मिलाप को लेकर निकली जाती है भव्य शोभायात्रा शोभा यात्रा में शामिल लोग जय श्रीराम- जय भरत भैया की जय करते हैं जयघोष छपरा, नगर प्रतिनिधि। शहर में भरत मिलाप चौक व साहेबगंज में रामलीला के तहत भरत मिलाप समारोह भव्य तरीके से मनाया जाता है। यह समारोह शहर के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है। प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाले इस समारोह का बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को इंतजार रहता है। भरत मिलन कार्यक्रम में कई बार ऐसे मौके आते हैं जब राम ,भरत व अन्य के किरदार निभाने वाले पात्रों के साथ-साथ लोगों की भी आंखें नम हो जाती है। रामलीला के तहत भाई श्रीराम व भरत जब आपस में गले मिलते हैं सबकी आंखें नम हो जाती हैं। कई बार ऐसा मौका आता है कि भाई को रोते देख श्रीराम भी भाव विह्वल हो जाते हैं। दोनों की आंखों से प्रेम की अश्रुधारा बहती है। आंखों की मूक भाषा ने एक-दूसरे के दर्द व भाव को समझते हैं। इधर श्रद्धालु भी भातृप्रेम के इस अनुपम दृश्य देख खुद को रोक नहीं पाते हैं। कई तो बोल पड़ते हैं कि भाइयों का यह प्रेम अब तो दुर्लभ है। अब कहां राम व भरत जैसे भाई मिलते हैं। स्वार्थ ने सबको अपने मोह पाश में जकड़ लिया है। भरत मिलाप को लेकर शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। भरत जी, शत्रुघ्न जी के साथ भाई भगवान राम से मिलने के लिए के पूरे लाव लश्कर के साथ निकलते हैं। शोभा यात्रा के पीछे श्रद्धालुओं का हुजूम – निकल पड़ता है। भरत मिलाप समारोह में राम का किरदार निभाने वाले शहर के ब्रह्मपुर निवासी धर्मेंद्र यादव बताते हैं कि भरत मिलाप समारोह के दौरान उन्हें अलौकिक शक्ति प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि राम के आदर्शों को सभी को अपनाना चाहिए। जहां-जहां भगवान राम को मानने वाले हैं ,वहां खुशी का माहौल है, भारत मिलाप शोभायात्रा समिति में सीता की किरदार निभाने वाली शहर के कटरा निवासी दिव्या कुमारी ने कहा कि भारत मिलन समारोह दिन प्रतिदिन नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है। समारोह से हमें यह अनुभव होता है कि मर्यादा में कैसे रहना है। भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। सारण में अब भी कायम है रामलीला की परंपरा सारण में अभी भी रामलीला की परंपरा कायम है। जिला मुख्यालय के अलावा रिविलगंज, तरैया व अन्य स्थानों पर हर साल रामलीला का मंचन किया जाता है, जिसमें आमजन का भी बराबर सहयोग रहता है। रामलीला देखने के लिए आस-पास के गांवों की भारी भीड़ एकत्र होती है। राम विवाह, भरत मिलाप, लक्ष्मण शक्ति व रावण वध का मंचन देखने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं। बुजुर्ग बताते हैं कि रामलीला बगैर ध्वनि विस्तारक यंत्रों के गैस के उजाले में होती थी। तबला, हारमोनियम व ढोल के साथ तमाम किरदार निभाए जाते थे, जिसमें यहां के हिदू-मुसलमान सब साथ देते थे। यहां तक कि अंग्रेज भी रामलीला देखने आते थे। समय बीतता गया व नए-नए लोग इससे जुड़ते गए।



Source link


Spread the love share